NF Railway (Construction)
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परियोजनाओं का विवरण उपलब्धियां निविदाएं ठेका बिल स्टे ठेकेदारों एवं सप्लासइरों का पंजीकरण शिड्यूल ऑफ पावर मॉडल शिड्यूल ऑफ पावर संपत्ति का विवरण लेखागार आर टी आई ट्रेन सूचनाएं रेलवे यूजर्स लॉगिन अन्ये रेलवे साइटें प्रशासनिक शब्दावली (अंग्रेजी-हिंदी) टिप्पणी उपलब्ध हिंदी पुस्तकों की सूची  

आर टी आई

 

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4(1)बी में सूचीबद्ध मैनुअल का प्रकाशन
मद संख्या (i): इसके संगठन, कार्यों और इसके कर्तव्यों का विवरण।
संगठन: वर्ष 1947 में देश के विभाजन पर, तत्कालीन बंगाल और असम रेलवे को भी नई राजनीतिक सीमा के आधार पर विभाजित किया गया था। परिणामस्वरूप, पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क को "असम रेलवे" के रूप में अगस्त, 1947 को पुनर्निर्माण किया गया था, जिसका मुख्यालय पांडू, मालीगाँव में  हुआ। 14 अप्रैल, 1952 को रेलों का राष्ट्रीयकरण किया गया और पुनर्गठन के तहत संपूर्ण असम रेल प्रणाली को नई रेल जोन का हिस्सा बनाया गया अर्थात् पूर्वोत्तर रेल जिसका मुख्यालय  गोरखपुर में हुआ। इसके अलावा, पूर्वोत्तर के विकास को और अधिक महत्व देने के लिए 15 जनवरी, 1958 को मालीगांव में मुख्यालय के साथ एक नया जोन पूर्वोत्तर सीमा रेल बनाया गया था।
1971 में, पूरे पूर्वोत्तर (एनई) क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक और संतुलित विकास के लिए भारत सरकार संसद में एक अधिनियम बनाकर "उत्तर पूर्वी परिषद" की स्थापना की। उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) ने पहाड़ी भू-भाग में असम के पड़ोसी उत्तर पूर्व के राज्यों में रेल नेटवर्क के विकास की मांग की और तदनुसार, 1979 में भारत सरकार ने छह पहाड़ी राज्यों में से प्रत्येक को रेलवे लाइन से जोड़ने का निर्णय लिया। उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) ने तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नद पर 3 किलोमीटर लंबे सड़क पुल का निर्माण करने और जमा अवधि (DIPOSIT Term) पर पुल के निर्माण का काम रेल को सौंपने का भी निर्णय लिया।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेल निर्माण परियोजनाओं पर विशेष बल दिए जाने के साथ रेल मंत्रालय ने इन नई परियोजनाओं के बेहतर प्रबंधन, नियंत्रण और निगरानी के लिए 1979 में गुवाहाटी में महाप्रबंधक की अध्यक्षता में एक अलग निर्माण इकाई बनाई। मालीगांव/गुवाहाटी में मुख्यालय सहित निर्माण संगठन और परियोजनाओं की आवश्यकता के अनुसार क्षेत्रीय इकाइयाँ (फिल्ड यूनिट्स) स्थापित की गई । मुख्यालय और क्षेत्रीय संगठन (फिल्ड यूनिट्स) को “संगठन चार्ट” में दर्शाया गया है।
कार्य:  पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए रेल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत प्रमुख रेल परियोजनाओं का सर्वेक्षण और निर्माण जैसे - नई रेल लाइनें,  मौजूदा मीटर गेज लाइनों का आमान परिवर्तन,  मौजूदा लाइनों का दोहरीकरण और पूर्वोत्तर सीमा रेल क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाले रेल के बुनियादी ढांचे की स्थापना के अन्य प्रमुख कार्य।

कर्तव्य: क्षेत्रीय रेलों और स्थानीय प्राधिकरणों के साथ संपर्क बनाए रखते हुए रेल मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई प्राथमिकताओं और निधियों के अनुसार विभिन्न परियोजनाओं की योजना और कार्य निष्पादन। यह निगरानी रखना एवं सुनिश्चित करना कि किए गए कार्य मानक गुणवत्ता के हैं और निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार पूरे किए गए हैं।
मद संख्या (ii): इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियाँ और कर्तव्य:
संगठन में अधिकारियों और कर्मचारियों की विभिन्न परतें हैं और वे शक्तियों की अनुसूची से और आगे समय-समय पर महाप्रबंधक द्वारा भारार्पण से अपनी शक्तियां प्राप्त करते हैं। कर्तव्य नियमावली और कोड के अनुरूप है जो परियोजना की प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार उनके नियंत्रक अधिकारियों द्वारा विभिन्न कर्मचारियों को सौंपे जाते हैं।
मद संख्या। (iii): पर्यवेक्षण और जवाबदेही की प्रणाली सहित निर्णय लेने की विधिवत प्रक्रिया अपनायी जाती है। शक्ति की अनुसूची में दिए गए प्रावधान के अनुसार अधिकारियों द्वारा कर्तव्य का निस्पादन पर्यवेक्षी और निर्णय लेने की प्रवृति की होती है।
मद संख्या (iv) : सतर्कता नोटिस, स्थानांतरण नीतियां, डीएआर, पदोन्नति नियम, धनवापसी नियम, दावे आदि जैसे दस्तावेजों में कार्यों के निर्वहन के मानदंड निर्धारित किए गए हैं जो विभिन्न निदेशालयों के तहत भारतीय रेल की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।
मद संख्या (v): अपने कार्यों के निर्वहन के लिए अपने कर्मचारियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले नियम, विनियम, निर्देश, मैनुअल और रिकॉर्ड: भारतीय रेल की वेबसाइट पर दस्तावेज उपलब्ध हैं।
मद संख्या (vi) : दस्तावेजों की श्रेणियाँ।
विभिन्न कार्यात्मक विभाग अर्थात् वित्त, सिविल इंजीनियरी, सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियरी, विद्युत इंजीनियरी, भंडार, परिचालन और कार्मिक शाखा के तहत निर्माण संगठन का कार्य आयोजित किया गया है जो विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को पूरा करने के लिए महाप्रबंधक के तहत समन्वित तरीके से संबंधित कार्यों के प्रति ध्यान रखते हैं। महाप्रबंधक/पू.सी.रेल के तहत कार्यरत सतर्कता प्रकोष्ठ द्वारा सतर्कता कार्य के प्रति सहयोग प्रदान किया जाता है। महाप्रबंधक/निर्माण के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करने वाले विभागाध्यक्ष संबंधित विभाग के तकनीकी प्रधान हैं जो एसओपी के अनुसार विषयों का निपटारा करते हैं और फील्ड इकाइयों को निर्देश देते हैं। इस संबंध में, रेल मंत्रालय द्वारा प्रकाशित/ अधिसूचित कोड, नियमावली, दिशानिर्देश आदि विभागवार निर्णय लेने में मदद करते हैं।
कोड/मैनुअल की सूची: दस्तावेज विभिन्न निदेशालयों के तहत भारतीय रेल की वेबसाइट पर उपलब्ध है। 
फिल्ड यूनिटों के प्रधान कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होते हैं, जिन्हें विशिष्ट परियोजनाओं के कार्य सौंपे जाते हैं। फिल्ड निरीक्षण, समन्वय बैठकों एवं आवधिक समीक्षा के माध्यम से फिल्ड के कार्य का पर्यवेक्षण महाप्रबंधक /विभागाध्यक्षों /वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाता है। फिल्ड यूनिट अपने इकाई के कार्य की मासिक स्थिति प्रस्तुत करते हैं, जिसमें प्रगति और बाधाओं एवं मुख्यालय से अपेक्षित सहायता का उल्लेख होता है।
परियोजना संबंधी कार्य बड़े पैमाने पर अनुबंध के माध्यम से सम्पन्न किए जाते हैं। परियोजना विवरण पहले स्थल की अवस्था के आधार पर बनाए जाते हैं और विस्तृत प्राक्कलन तैयार किए जाते हैं फिर सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के लिए भेजे जाते हैं। आगे कार्य की योजना और धन की उपलब्धता के आधार पर, कार्य के अलग घटक के लिए निविदा को अंतिम रूप दिया जाता है और अनुबंध-करार में शामिल होने वाली एजेंसी तय की जाती है। आगे चलकर तकनीकी आवश्यकताओं और कार्य की विशिष्टताओं के आधार पर फिल्ड में प्रगति की निगरानी की जाती है ताकि कार्य को समय पर पूरा किया जा सके। सार्वजनिक यात्री परिवहन से सम्मिलित नई लाइन / परिसंपत्तियों को चालू करने से पहले ट्रेन संचालन में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेल संरक्षा आयुक्त के स्वतंत्र निकाय द्वारा निरीक्षण / अनुमोदन किया जाता है। पूरी की गई परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए क्षेत्रीय रेलवे (एनएफआर) को सौंप दिया जाता है।
मद संख्या (vii): नीति के निर्माण या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के साथ परामर्श या प्रतिनिधित्व के लिए मौजूद किसी भी व्यवस्था का विवरण  इस प्रकार है:
क्षेत्रीय स्तर पर सुझाव देने के लिए जोनल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति (जेडआरयूसीसी) कार्य कर रही है। इसी प्रकार मंडल स्तर पर मंडल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति (डीआरयूसीसी) कार्य कर रही है।
मद संख्या (viii) : इसके द्वारा गठित दो या दो से अधिक व्यक्तियों वाले बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों का विवरण। इसके अतिरिक्त, इस बारे में जानकारी कि क्या इनकी बैठकें जनता के लिए खुली हैं, या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त जनता के लिए सुलभ हैं: माननीय सांसदों की औपचारिक और अनौपचारिक सलाहकार समिति (संसदीय मामलों के मंत्रालय द्वारा गठित) का दौरा करती है और आंतरिक रूप से चर्चा करती है। इसकी बैठकें और उसके कार्यवृत्त जनता के लिए खुले/सुलभ नहीं हैं।
मद संख्या (ix): इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका।
मद संख्या (x): इसके विनियमों में प्रदान किए गए मुआवजे की प्रणाली सहित इसके प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक;
मद संख्या (xi): सभी योजनाओं, प्रस्तावित व्यय और किए गए संवितरण पर रिपोर्ट का विवरण दर्शाते हुए अपनी प्रत्येक एजेंसी को आवंटित बजट- विभिन्न परियोजनाओं के लिए रेल मंत्रालय से प्राप्त बजट आवंटन संबंधित फाइल इकाइयों के बीच वितरित किया जाता है। बजट आवंटन भारतीय रेलवे की वेबसाइट www.indianrailways.gov.in पर उपलब्ध है।
मद संख्या (xii): सहायिकी(सब्सिडी) कार्यक्रमों के निष्पादन का तरीका, जिसमें आवंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के विवरण और लाभार्थी शामिल हैं;
पू.सी.रेल (निर्माण) में लागू नहीं है।
मद संख्या (xiii): इसके द्वारा दी गई रियायतों, परमिटों या प्राधिकरण के प्राप्तकर्ताओं का विवरण: पू.सी.रेल (निर्माण) पर लागू नहीं है।
मद संख्या (xiv): इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध या उसके पास रखी गई जानकारी का विवरण;
निर्माण वेब साइट संख्या www.nfrlyconstruction.org  में उपलब्ध जानकारी इस प्रकार है:
(i) निविदाओं और अनुबंधों के बारे में जानकारी
(ii) निर्माणाधीन प्रमुख परियोजना, चल रहे कार्यों की प्रगति, पूर्ण की गई परियोजनाएं, किया गया निवेश।
(iii) परिव्यय, व्यय और मील के पत्थर के विवरण के साथ उपलब्धियां
(iv) बिल की स्थिति
(v) ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं का पंजीकरण
 मद संख्या (xv): सूचना प्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं का विवरण, जिसमें पुस्तकालय या वाचनालय के काम के घंटे शामिल हैं, यदि सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए रखा गया है - इस संगठन पर लागू नहीं है।
मद संख्या 16: लोक सूचना अधिकारियों के नाम पदनाम और अन्य विवरण;
अपीलीय प्राधिकारी, लोक सूचना अधिकारी, जन सूचना अधिकारी और सहायक के नाम, पदनाम और अन्य विवरण नीचे उल्लिखित हैं:
आर.टी.आई.अपीलीय प्राधिकारी: श्री अंजनी कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी/नि.-1
मुख्य जनसूचना अधिकारी : रिक्त
जनसूचना अधिकारी: अनुलग्नक-1 के अनुसार
जनसूचना अधिकारी – फील्ड ऑफिस में।
श्री प्रदीप चौधरी, उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखा अधिकारी/नि/3
श्री गुनिन चौधरी, कार्यापालक इंजीनियर/नि/आई.सी./अगरतला
श्री सुभासिस दास, उप मुख्य सिगनल एवं दूर संचार इंजीनियर/नि/ए.पी.डी.जे.
श्री योगेश मीणा, उप मुख्य इंजीनियर/नि/एन.जे.पी.
श्री जी. सिंह, उप मुख्य इंजीनियर/नि/कटिहार/1
श्री कुशल दत्ता, सहायक कार्यापालक इंजीनियर/नि/जोगीघोपा
श्री पिंकू, उप मुख्य इंजीनियर/नि/जिरीबाम-2
श्री एम.के. मीना, उप मुख्य इंजीनियर/नि//इम्फाल-2
उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त/नि/मालीगांव
राजभाषा अधिकारी/नि/मालीगांव
उप मुख्य इंजीनियर/नि/ट्रैक/मालीगांव
श्री सिद्धार्थ मुखर्जी, उप मुख्य सामग्री प्रबंधक/नि/मालीगांव
उप मुख्य इंजीनियर/नि/लामडिंग/1
श्री अमोल इंगले चंद्रकांत, उप मुख्य इंजीनियर/नि /सर्वे/ मालीगांव
उप मुख्य परिचालन प्रबंधक/नि-1/मालीगांव
श्री जयदीप चक्रवर्ती, उप मुख्य इंजीनियर/नि/बजट
उप मुख्य इंजीनियर/नि/अभिकल्प-1/मालीगांव
श्री हाजीमल मीना, उप मुख्य इंजीनियर/नि/कोहिमा
श्री के.टी. सिंह, उप मुख्य इंजीनियर/नि/डिमापुर-1
श्री अयान मजूमदार, विधि अधिकारी/नि /मालीगांव
श्री पंकज यादव, उप मुख्य इंजीनियर/नि/पासीघाट
श्री पी.के. हीरा, उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर/नि/मालीगांव
श्री हरीश चंद्र, उप मुख्य इंजीनियर/नि/योजना-1/मालीगांव
श्री बादल सिंह राणा, उप मुख्य इंजीनियर/नि/मालीगांव-1
श्रीमती नीलू कुमारी, उप मुख्य इंजीनियर/नि/मालीगांव-3, 4 एवं 
श्री देवकांत बोरो, सहायक बिजली इंजीनियर/नि/मालीगांव
श्री दीपक कुमार गुप्ता, उप मुख्य बिजली इंजीनियर/नि/आर.ई.-1/मुख्यालय/मालीगांव 
श्री अभिमन्यु प्रसाद, सहायक कार्मिक अधिकारी/नि/मालीगांव

 

 

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